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Category: Literature
हीउ संसारु (The World)
केर अगे, केर पोए, काने पतो हीन संसार में,
महंत हलंदा रहया, साधु घुमंदा रहया।
वक़्त जी रफ़्तार में, सभु छड़जी विया,
कारवां मढ़िया रहया, राही सधंदा रहया।
केर अगे, केर पोए, काने पतो हीन संसार में,
संत चवंदा रहया, सूफी गांइदा रहया।
राजा अते रंक सभु, हिकड़ी ई धूड़ में,
महल ढाही विया, मढ़ियो जुरंदा रहया।
केर अगे, केर पोए, काने पतो हीन संसार में,
सिक में सभु भाकियू डियन, पर सचाई खा बिया,
पंहिंजी ई धुन में इते, सभु विसरी वया।
सिर्फ़ नामु साहिब जो, रहिजी वेन्दो इते,
केर अगे, केर पोए, काने पतो हीन संसार में,
माया जो जालो इते, सभखें विळ्हे थियो,
जो आयो खाली हत्थ, सो खाली हली वियो।
सिर्फ़ नामु साहिब जो, रहिजी वेन्दो इते,
केर आगे केर पोए, नाहे पतो हीन संसार में,
महंत हलंदा रहया, साधु घुमदा रहया।
~ A thought by Jairam Gyani with help from Gemini 🌸
हेमू की कुर्बानी
Hemu Kalani https://en.wikipedia.org/wiki/Hemu_Kalani
हेमू की कुर्बानी को याद करेगा हिंदुस्तान ।
दासता की बेड़ियों में जकड़ी हुई थी भारत माता।
हेमू जैसे वीर सेनानी को चैन कहां से आता।।
इस क्रांतिकारी के नारों से गूंज उठा हिंदुस्तान।।
हेमू की कुर्बानी को याद…….
क़ौमी तिरंगा लेकर जब चलते थे क्रांतिकारी।
बालक का अद्भुत साहस उनसे भी था भारी ।
लिए तिरंगा टोली के संग, सबको किया हैरान ।।
हेमू की कुर्बानी को याद…..
किस्से वीर शहीदों के मां से खूब सुने थे उसने ।
आज़ाद ,भगत ,शिवाजी के सपने बुने थे उसने।
बचपन में ही खेल खेल में किये अनोखे काम।।
हेमू की कुर्बानी को याद……..
लगी ख़बर हेमू को रेल बारूद की आनी है।
खूनी होली उसी बारूद से खेली जानी है।
सेन्य बारुद की गाड़ी का करना था काम तमाम ।
हेमू की कुर्बानी को याद…..
विफल हुई योजना ना मिला किस्मत का साथ ।
अस्त व्यस्त न हुई पटरी,लगा हेमू फ़िरंगी के हाथ
सही यातनाएं ढेरों पर ना बतलाऐ मित्रों के नाम ।।
हेमू की कुर्बानी को याद….
चूमा फंदा फांसी का हुआ ना कोई मलाल
पुनः जन्म हो इस धरती पर ऐसा था वो लाल
भारत माँ के वीरों को याद करेगा हिंदुस्तान।
हेमू की कुर्बानी को याद……..
रचियता:- घनश्याम ” घनिष्ठ “
करि ख़बर
करि ख़बर तूँ मुहिंजा यार – छा चवां मां , कहिंखे बुधायां ।
किथे हुयासी , किथे पहुँतासी – सिँधु छढे॒ हिंदु में आयासी । करि …
पर सिँधी थी , सिँधी रहियांसी – मज़हब मुंझायो सोचियो से कीनकी ।
मुहिंजो ख़ुदा , या मुहिंजो परिमात्मा – समझ न आई भाई । करि …
वकतु अजायो मूँ विञायो , जा॒तुमु कोन मूँ तोखे सांई ।
कढी मंदाई , करि चङाई सभसां – पोइ पसूँ ख़ुदा जे नूर खे । करि ..
Copyright 2006 – Jairam Gyani